पहली बार सामने आई हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की चयन प्रक्रिया, हर 20 में से एक छात्र को ही मिलता है एडमिशन

content-single



न्यूयॉर्क. हर साल हजारों छात्र यही सोचते हैं कि ए ग्रेड अौर परफेक्ट 10 का स्कोर होने के बावजूद वे हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एडमिशन क्यों नहीं ले पाते? उन्हें एडमिशन नहीं मिल पाने की वजह यह है कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी हर 20 में से एक ही छात्र को चुनती है। पढ़ाई के पिछले रिकॉर्ड से ज्यादा एथलीटिक्स और एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी पर जोर दिया जाता है।

हार्वर्डयूनिवर्सिटी को हर साल 43 हजार एप्लीकेशंस मिलती हैं, लेकिन सिर्फ 2024 ही एडमिशन ले पाते हैं। बॉस्टन की एक फेडरल कोर्ट में सुनवाई के दौरान हारवर्ड यूनिवर्सिटी में छात्रों को प्रवेश देने की प्रक्रिया से जुड़ा आंकड़ा पहली बार दुनिया के सामने आया। हार्वर्ड पर एशिया और अमेरिकी एप्लीकेंट्स के साथ भेदभाव करने का आरोप है।

हार्वर्डके मुकाबले बाकी यूनिवर्सिटी में अर्जियां ज्यादा
अमेरिका में सिर्फ हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ऐसी नहीं है, जिसके पास सबसे ज्यादा एप्लीकेशंस आती हैं। दो साल पहले कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के पास एक लाख एप्लीकेशंस पहुंची थीं। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए इस साल 75 हजार एप्लीकेशंस आईं।

हार्वर्डयूनिवर्सिटी के डीन विलियम आर फित्जसिमंस ने कोर्ट में दी गवाही में सिलेक्शन प्रॉसेस बताई

  • पहले एप्लीकेशंस को 20 ग्रुप्स में बांटा जाता है। इन्हें कैलिफोर्निया, टैक्सास, वर्जीनिया, मैरीलैंड, डेलावेयर और कोलंबिया जैसे शहरों के मुताबिक रखा जाता है। इन्हें डॉकेट्स कहते हैं।
  • इसके बाद चार से पांच एडमिशन ऑफिसर्स की एक सबकमेटी छात्रों के लिखे निबंध, ट्रांस्क्रिप्ट्स, टेस्ट स्कोर्स और रिकमेंडेशन लेटर्स खंगालती है। सबकमेटी यह भी देखती है कि छात्र किस नस्ल या किस क्षेत्र का रहने वाला है।
  • इसके बाद हर एप्लीकेशन की एक समरी शीट बनती है। इसमें कमेंट्स होते हैं और उम्मीदवार को 1 से 6 के बीच रेटिंग दी जाती है। 1 यानी सबसे बेहतर और 6 यानी सबसे कम और एडमिशन की संभावना ही नहीं।
  • यह रेटिंग एकेडमिक, एक्स्ट्रा करिकुलर, एथलीटिक और पर्सनल रिकॉर्ड पर दी जाती है। पर्सनल कैटेगरी में छात्र के लीडरशिप स्किल्स और कैरेक्टर को देखा जाता है।
  • कुछ एप्लीकेशंस को सबकमेटी के ही अन्य सदस्यों को भी दिया जाता है ताकि वे भी अपनी रेटिंग लिख सकें। असमंजस की स्थिति में एक प्रोफेसर भी रेटिंग्स को पढ़ता है।
  • पूर्व छात्रों की टिप्पणियों को भी महत्व दिया जाता है। इसके बाद सबकमेटी की बैठक होती है और वोटिंग होती है।
  • इसके बाद फाइल को 40 लोगों की एडमिशन कमेटी के पास भेजा जाता है। यही कमेटी अंतिम फैसला करती है।

परफेक्ट टेस्ट और ग्रेड स्कोर के बावजूद सभी को अच्छी रेटिंग नहीं मिलती
हार्वर्डयूनिवर्सिटी की एडमिशन प्रोसेस में कमेटियों की रेटिंग बहुत मायने रखती है। हजारों छात्रों के परफेक्ट टेस्ट और ग्रेड स्कोर हाेते हैं। इसके बावजूद वे अच्छी रेटिंग हासिल नहीं कर पाते। अलग-अलग एडमिशन साइकल में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को मिली ऐसी 1.60 लाख एप्लीकेशंस के एनालिसिस से पता चलता है कि 55 हजार से ज्यादा छात्रों की फाइलों को 1 या 2 रेटिंग नहीं मिलती। 1 रेटिंग पाने वाले छात्रों की संख्या महज 100 के आसपास होती है।

एकेडमिक से ज्यादा एथलीटिक्स, पर्सनल स्किल्स को तवज्जो
हार्वर्डछात्रों के पिछले एकेडमिक रिकॉर्ड से ज्यादा एक्स्ट्रा करिकुलर, एथलीटिक्स और पर्सनल स्किल्स को तवज्जो देता है। एक्स्ट्रा करिकुलर प्रोफाइल में 1 रेटिंग पाने वाले 48% छात्रों को हार्वर्ड में एडमिशन मिला। पर्सनल प्रोफाइल में 1 रेटिंग हासिल करने वाले 66% और एथलेटिक्स में नंबर वन रेटिंग पाने वाले 88% छात्रों को हार्वर्ड ने एडमिशन दिया।

382 साल पुरानी है हार्वर्डयूनिवर्सिटी
हॉर्वर्डयूनिवर्सिटी 1636 में बनी थी। इसकी 11 अलग-अलग एकेडमिक यूनिट्स हैं। अमेरिका के 8 पूर्व राष्ट्रपति, 158 नोबेल सम्मानित हस्तियां और दुनिया के 62 मौजूदा अरबपति यहां के पासआउट हैं। रतन टाटा, राहुल बजाज, सुब्रमण्यम स्वामी, पी चिदंबरम, कपिल सिब्बल और ज्योतिरादित्य सिंधिया हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एल्युमनी रहे हैं।

Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी।

Source: bhaskar international story

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »